Kahaniyon Ka Kahaniyaana
कहानियों का कहानियाँना
- Pages160
- LanguageHindi
- PublisherHind Yugm
- Publication2025
- ISBN978-8119555291
- EditionSpecial Edition
Kahaniyon Ka Kahaniyaana
कहानियों का कहानियाँना
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कल्पना और यथार्थ का अनोखा मेल — जहाँ घर अपनी जगह बदल सकता है और सड़क पर रेलगाड़ी चल सकती है। विनोद कुमार शुक्ल की विशिष्ट कथा-दुनिया।
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Paperback
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‘कहानियों का कहानियाँना’ ऐसी कहानियों का संसार प्रस्तुत करता है जहाँ कल्पना किसी अलग दुनिया में जाने का माध्यम नहीं, बल्कि हमारे आसपास की दुनिया को नए ढंग से देखने का तरीका बन जाती है। विनोद कुमार शुक्ल सामान्य घटनाओं को इस तरह प्रस्तुत करते हैं कि परिचित चीज़ें भी अचानक अनजानी और रोचक दिखाई देने लगती हैं — घर अपनी जगह बदल सकता है, रेलगाड़ी और बस की पहचान आपस में घुल सकती है, और एक साधारण ट्रैफिक सिपाही किसी विचित्र कथा-परिस्थिति का हिस्सा बन सकता है। यहाँ कल्पना स्वयं कहानी का एक पात्र बन जाती है। इस संग्रह की भाषा सहज दिखाई देती है, लेकिन उसके भीतर अर्थ की कई परतें मौजूद हैं। पाठक कभी कहानी की विचित्रता पर मुस्कुराता है, कभी उसके पीछे छिपी मानवीय संवेदना को महसूस करता है।

Vinod Kumar Shukla · विनोद कुमार शुक्ल
विनोद कुमार शुक्ल भारतीय हिंदी साहित्य के अत्यंत सम्मानित और विशिष्ट रचनाकारों में शामिल हैं। उनका जन्म 1937 में हुआ। कविता और कथा दोनों क्षेत्रों में उन्होंने ऐसी विशिष्ट भाषा और शैली विकसित की, जिसमें आश्चर्य, संवेदना, कल्पना और सामाजिक सरोकार एक साथ दिखाई देते हैं। उनकी रचनाएँ अनेक भाषाओं में अनूदित हो चुकी हैं और उनका प्रभाव रंगमंच तथा सिनेमा तक भी पहुँचा है। उनके प्रकाशित साहित्य में नौ कविता-संग्रह, पाँच कहानी-संग्रह और छह उपन्यास शामिल हैं। उन्हें ज्ञानपीठ पुरस्कार, साहित्य अकादेमी पुरस्कार (‘दीवार में एक खिड़की रहती थी’), रघुवीर सहाय स्मृति पुरस्कार, रज़ा पुरस्कार, शिखर सम्मान और दयावती मोदी कवि शेखर सम्मान सहित अनेक सम्मान मिले हैं। वर्ष 2023 में उन्हें PEN/Nabokov Award से सम्मानित किया गया।
More books by Vinod Kumar Shukla →- ISBN
- 978-8119555291
- Publisher
- Hind Yugm
- Published
- 24 September 2025
- Edition
- Special Edition
- Language
- Hindi
- Format
- Paperback
- Print length
- 160 pages
- Dimensions
- 12.9 × 1.1 × 19.8 cm
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