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Pustakdham
  • Pages256
  • LanguageHindi
  • PublisherHind Yugm
  • Publication2025
  • ISBN978-8119555741
  • EditionFirst Edition

Phir Milogi

फिर मिलोगी

by Madhu Chaturvedi

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एक ट्रेन यात्रा की मुलाकात, जो वर्षों बाद भी वसुधा के भीतर जीवित है — प्रेम, स्मृति, अकेलेपन और स्त्री-मन की गहरी परतों का संवेदनशील उपन्यास।

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‘फिर मिलोगी’ उस प्रेम और आकर्षण की कहानी है जो समय और दूरी के बावजूद मन से पूरी तरह समाप्त नहीं होता। उपन्यास की केंद्रीय पात्र वसुधा अपने वर्तमान जीवन में रहते हुए भी अतीत से जुड़े एक ऐसे एहसास को अपने भीतर संभाले हुए है जिसे वह पूरी तरह भूल नहीं पाती। वर्षों पहले हुई एक ट्रेन यात्रा में मिली मुलाकात उसके जीवन की ऐसी स्मृति बन जाती है जो समय गुजरने के साथ मिटने के बजाय और गहरी होती जाती है। वसुधा की शादीशुदा जिंदगी में मौजूद सूनापन उसके भीतर के इस पुराने भाव को और अधिक तीव्र बनाता है। क्या हर रिश्ता केवल उसके नाम और सामाजिक पहचान से परिभाषित होता है? क्या कुछ भावनाएँ बिना किसी नाम के भी जीवन भर साथ रह सकती हैं? मधु चतुर्वेदी की लेखनी की खासियत इसकी संवेदनशीलता, सौंदर्य और भावनात्मक गहराई है — कहानी पढ़ते हुए पाठक केवल घटनाओं को नहीं देखता, बल्कि पात्रों के भीतर चल रहे द्वंद्व और स्मृतियों को भी महसूस करता है।

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