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Pustakdham
Ekant Mein Rota Purush — image 1
Ekant Mein Rota Purush — image 2
  • Pages128
  • LanguageHindi
  • PublisherHarsingar Prakashan
  • Publication2025
  • ISBN9788199707337
  • EditionFirst Edition

Ekant Mein Rota Purush

एकांत में रोता पुरुष

by Priyesh Malviya

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एकांत में रोता पुरुष — प्रियेश मालवीय का हिंदी कविता-संग्रह, जो पुरुषों की अनकही भावनाओं, अकेलेपन, मानसिक संघर्ष और समाज की अपेक्षाओं के बीच दबे संवेदनशील मन को साहित्यिक अभिव्यक्ति देता है।

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‘एकांत में रोता पुरुष’ लेखक प्रियेश मालवीय का हिंदी कविता-संग्रह है, जो पुरुषों की भावनात्मक संवेदनशीलता और अकेलेपन को केंद्र में रखता है। समाज में पुरुषों से अक्सर मजबूत, आत्मनिर्भर और भावनाओं पर नियंत्रण रखने की अपेक्षा की जाती है। इस सामाजिक सोच के बीच उनकी उदासी, असुरक्षा, मानसिक थकान और भावनात्मक संघर्ष कई बार अनकहे रह जाते हैं। पुस्तक का शीर्षक भी उसी स्थिति की ओर संकेत करता है, जहाँ व्यक्ति अपने दुख को दूसरों से छिपाकर अकेले में व्यक्त करता है। कुछ भावनाएँ ऐसी होती हैं जिन्हें शब्दों में व्यक्त करना आसान नहीं होता — व्यक्ति बाहर से सामान्य दिखाई दे सकता है, लेकिन उसके भीतर अनेक सवाल, स्मृतियाँ और संघर्ष मौजूद हो सकते हैं। एकांत, मौन और भावनात्मक पीड़ा जैसे विषय इस संग्रह की प्रमुख ध्वनि हैं। यह रचना यह विचार सामने रखती है कि संवेदनशील होना किसी व्यक्ति की कमजोरी नहीं है — पुरुषों के जीवन में भी प्रेम, दुख, निराशा और भावनात्मक सहारे की आवश्यकता मौजूद होती है।

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