
- Pages256
- LanguageHindi
- PublisherHind Yugm
- Publication2026
- ISBN9788169516051
- EditionFirst Edition
Coffee Ke Cup Mein Chaay
कॉफ़ी के कप में चाय
by Manav Kaul
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कॉफ़ी के कप में चाय प्रसिद्ध लेखक मानव कौल का एक संवेदनशील हिंदी उपन्यास है, जो स्मृतियों, पारिवारिक रिश्तों, अकेलेपन और आत्मखोज की भावनात्मक यात्रा को सामने लाता है। मुंबई से कश्मीर और यूरोप तक फैली यह कहानी एक ऐसे लेखक के जीवन को उजागर करती है, जो अपने अतीत, पिता की यादों और अनकहे रिश्तों के बीच खुद को समझने की कोशिश करता है। मानवीय भावनाओं और जीवन की गहराइयों को समझने वाले पाठकों के लिए यह एक विचारशील साहित्यिक उपन्यास है।
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Paperback
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कुछ यात्राएँ हमें नई जगहों तक पहुँचाती हैं, जबकि कुछ यात्राएँ हमें उन यादों के करीब ले जाती हैं जिनसे हम वर्षों से दूर भाग रहे होते हैं। मानव कौल का उपन्यास ‘कॉफ़ी के कप में चाय’ ऐसी ही एक यात्रा की कहानी है। कहानी के केंद्र में एक लेखक है, जिसकी यात्राओं और लेखन ने उसे बार-बार अपने प्रियजनों से दूर किया है। पिता के निधन के कई वर्षों बाद एक अप्रत्याशित दृश्य उसके भीतर ऐसी स्मृतियों को जीवित कर देता है, जिन्हें वह शायद पीछे छोड़ चुका था। इन यादों के साथ उसके पिता से जुड़े अनकहे रिश्ते, रूमिका की उपस्थिति और जीवन के वे अधूरे सवाल सामने आने लगते हैं, जिनका सामना करना उसके लिए आसान नहीं है। उपन्यास में मुंबई, कश्मीर और यूरोप की यात्राएँ केवल भौगोलिक स्थानों का परिवर्तन नहीं हैं — ये नायक के भीतर चल रही भावनात्मक उथल-पुथल और आत्मखोज की प्रक्रिया का भी हिस्सा हैं। हर नई जगह, हर मुलाकात और हर स्मृति उसे अपने अतीत के किसी नए पहलू से परिचित कराती है। कहानी धीरे-धीरे यह सवाल उठाती है कि क्या इंसान वास्तव में अपने अतीत से दूर जा सकता है, या कुछ रिश्ते और यादें जीवनभर उसके साथ चलते रहते हैं? इस उपन्यास की विशेषता उन मानवीय संबंधों का चित्रण है, जिन्हें परिभाषित करना हमेशा आसान नहीं होता — पिता की स्मृतियाँ, अपराधबोध, रूमिका से जुड़ा भावनात्मक संसार और अकेलेपन के अनुभव कहानी को गहराई प्रदान करते हैं। पुस्तक का शीर्षक भी अपने भीतर एक अर्थ समेटे हुए है: जैसे कॉफ़ी के कप में अप्रत्याशित रूप से चाय मिल जाना, वैसे ही जीवन की अनजान परिस्थितियों में कभी-कभी अपनापन मिल जाता है। ‘कॉफ़ी के कप में चाय’ प्रेम, परिवार, बिछड़ने, स्मृतियों और स्वयं को स्वीकार करने की एक संवेदनशील साहित्यिक यात्रा है। लेखक के बारे में — मानव कौल (Manav Kaul) एक भारतीय लेखक, अभिनेता, नाटककार और निर्देशक हैं। हिंदी साहित्य में उनकी पहचान मानवीय भावनाओं, स्मृतियों, रिश्तों और जीवन के व्यक्तिगत अनुभवों को संवेदनशील ढंग से प्रस्तुत करने वाले रचनाकार के रूप में है। उनकी प्रमुख पुस्तकों में ठीक तुम्हारे पीछे, प्रेम कबूतर, तुम्हारे बारे में, बहुत दूर कितना दूर होता है, चलता-फिरता प्रेत, अंतिमा, शर्ट का तीसरा बटन, रूह, तितली, पतझड़, कतरनें, साक्षात्कार, संयम और नास्तिक की प्रार्थना शामिल हैं।

Manav Kaul · मानव कौल
मानव कौल भारतीय अभिनेता, नाटककार, रंगमंच निर्देशक और हिंदी लेखक हैं। उनका जन्म कश्मीर के बारामूला में हुआ और परवरिश मध्य प्रदेश के होशंगाबाद में हुई। मुंबई में लंबे समय से सक्रिय उन्होंने अभिनय, नाट्य-निर्देशन और साहित्य में अपनी विशेष पहचान बनाई है। उनके संवेदनशील गद्य और विशिष्ट साहित्यिक दृष्टिकोण की रचनाओं में ‘ठीक तुम्हारे पीछे’, ‘प्रेम कबूतर’, ‘तुम्हारे बारे में’, ‘बहुत दूर, कितना दूर होता है’, ‘चलता-फिरता प्रेत’ और ‘अंतिमा’ शामिल हैं — ‘अंतिमा’ उनकी छठी पुस्तक और पहला उपन्यास है।
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- 9788169516051
- Publisher
- Hind Yugm
- Published
- 12 September 2026
- Edition
- First Edition
- Language
- Hindi
- Format
- Paperback
- Print length
- 256 pages
- Dimensions
- 12.9 × 1.4 × 19.8 cm
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